B.A Ancient History Notes in Hindi

मंदिर स्थापत्य की नागर शैली की प्रमुख विशेषताएं

मंदिर स्थापत्य की नागर शैली की प्रमुख विशेषताएं | Naagar Shaili Ki Vishestaye B.A 3rd Year Notes

इस पोस्ट में हम मंदिर स्थापत्य की नागर शैली की प्रमुख विशेषताएं के बारे में वर्णन करेंगे। इस पोस्ट में हम नागर शैली का परिचय देंगे फिर नागर शैली की प्रमुख विशेषताओं के बारे में जानेंगे। परिचय नागर शैली उत्तर भारतीय हिंदू मंदिर वास्तुकला की एक प्रमुख शैली है, जो विशेष रूप से हिमालय से […]

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गुप्तकालीन मंदिरों की वास्तुगत विशेषताओं का वर्णन

गुप्तकालीन मंदिरों की वास्तुगत विशेषताओं का वर्णन | Guptakaleen mandiro ki vaastugat visheshtayo ka vernan

इस पोस्ट में हम गुप्तकालीन मंदिरों की वास्तुगत विशेषताओं का वर्णन | Guptakaleen mandiro ki vaastugat visheshtayo ka vernan करेंगे। इस पोस्ट में हम गुप्तकालीन कला का परिचय देंगे फिर गुप्तकालीन मंदिरों की वास्तुगत विशेषताओं के बारे में जानेंगे। परिचय गुप्तकाल (लगभग 320 से 550 ई.) भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर था, जिसे भारतीय

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खजुराहो के मंदिरों की स्थापत्य विशेषताएं

खजुराहो के मंदिरों की स्थापत्य विशेषताएं | Khajuraho ke mandiro ki vishestaye B.A 3rd Year Notes

इस पोस्ट में हम खजुराहो के मंदिरों की स्थापत्य विशेषताएं Khajuraho ke mandiro ki vishestaye पर चर्चा करेंगे। इस पोस्ट को पढ़कर आप यह जान पाएंगे कि खजुराहो का मंदिर कहां स्थित है? , इस मंदिर का निर्माण किस वंश के शासकों ने किया था और खजुराहो के मंदिरों की स्थापत्य विशेषताएं क्या है। इन

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टॉयनबी के अनुसार सभ्यता के उत्थान एवं पतन की प्रक्रिया B.A 3rd year Notes

टॉयनबी के अनुसार सभ्यता के उत्थान एवं पतन की प्रक्रिया B.A 3rd year Notes

इस पोस्ट में हम टॉयनबी के अनुसार सभ्यता के उत्थान एवं पतन की प्रक्रिया B.A 3rd year Notes के बारे में चर्चा करेंगे। इस पोस्ट में flow chart के माध्यम से पूरी थ्योरी को समझाने का प्रयास किया गया है। इसलिए पोस्ट को अंत तक पढ़ें। परिचय टॉयनबी के अनुसार सभ्यता के उत्थान और पतन

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रांके द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ और उनका महत्व

रांके द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ और उनका महत्व B.A 3rd Year Notes

ऐतिहासिक लेखन के क्षेत्र में रांके के योगदान का परीक्षण कीजिए।ORरांके द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालें और उनके महत्व पर चर्चा करें। आज इस पोस्ट में हम आपकोरांके द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ और उनका महत्व B.A 3rd Year Notes के बारे में चर्चा करेंगे। इस पोस्ट में हम रांके

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हेलेनिस्टिक सभ्यता की प्रमुख विशेषतायें

हेलेनिस्टिक सभ्यता यूनानी सभ्यता का विकृत रूप नहीं है अपितु यह एक नवीन सामाजिक तथा सांस्कृतिक व्यवस्था थी जो यूनानी तथा पूर्वीय (Oriental) तत्वों के सम्मिश्रण से प्रादुर्भूत हुई थी। हेलेनिस्टिक सभ्यता का समकालीन सभ्यताओं से अन्तर भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनसे उसकी समानता महत्वपूर्ण है। हेलेनिस्टिक काल का राजनीतिक दृष्टिकोण मुख्यतः सार्वभौमिक

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Confucius ka jeevan aur shikshaye

कन्फूशियस का जीवन- परवर्ती चोऊ युग में आविर्भूत दार्शनिक सम्प्रदायों में कन्फूशियस (कुंग फूत्ज़े) का सम्प्रदाय सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुआ । उसकी परम्परागत ज्ञात तिथियाँ (551-479 ई० पू०) स्थूलतः सही मानी जा सकती हैं। कहा जाता है कि उसका जन्म लू राज्य के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उसके पिता की मृत्यु उसकी बाल्यावस्था

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चोल साम्राज्य के प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं

चोल वंश – परिचय  कृष्णा तथा तुंगभद्रा नदियों से लेकर कुमारी अन्तरीप तक का विस्तृत भूभाग प्राचीन काल में तमिल प्रदेश का निर्माण करता था। इस प्रदेश में तीन प्रमुख राज्य थे-चोल, चेर तथा पाण्ड्य।  अति-प्राचीन काल में इन तीनों राज्यों का अस्तित्व रहा है। अशोक के तेरहवें शिलालेख में इन तीनों राज्यों का स्वतन्त्र

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ऑगस्टस के जीवन चरित्र एवं उपलब्धियों का वर्णन | Augustus ke jeevan charitra aur uplabdhiyon ka vernan| Augustus ka yogdan

Que)  प्राचीन रोम के इतिहास में आगस्टस के योगदानों का मूल्यांकन कीजिए।      (OR) Que) ऑगस्टस के जीवन चरित्र एवं उपलब्धियों का निरूपण कीजिए। Ans)  सामान्य परिचय —  आक्टेवियन ने आगस्टस के नाम से शासन करना आरम्भ कर दिया। आगस्टस’ का अर्थ होता है, महामहिम। सेनेट पर उसका ऐसा जादू चला कि बिना माँगे ही प्रिंसेप

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होमरकालीन यूनानी सभ्यता का विवरण दीजिए| Homarkaleen Unani sabhyata ka vivran

मध्यकाल की प्रारम्भिक दो शतियों को वीरगाथाकाल भी कहा गया है। वीरगाथाकाल की अंतिम शती (850-750 ई.पू.) के होमर तथा हेसिअड नामक कवियों की रचना से मध्यकाल के विषय में सूचनाएं मिलती हैं। होमर की कृतियों को यूनानी बाइबिल कहा गया है। इसमें होमरकृत इलियड एवं ओडिसी का स्थान विशेष महत्वपूर्ण है। इसमें रचनाकाल की

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